Army Weapons Theft: मामला सिकंदराबाद के बोलारम थाना क्षेत्र में स्थित सेना की हथियार और गोला-बारूद रखने वाले शस्त्रागार का है. यहां से पांच असॉल्ट राइफल, सात पिस्तौल, 21 मैगजीन, हथियारों का गोला-बारूद और रात में देखने के लिए इस्तेमाल होने वाली एक पैसिव नाइट विजन दूरबीन चोरी हो गई है.
अधिकारियों के मुताबिक, तेलंगाना पुलिस और सेना की विभिन्न जांच एजेंसियों की संयुक्त कोशिशों के बाद इस मामले में फिलहाल एक सैन्यकर्मी हिरासत में लिया गया है. पुलिस और सेना ने अभी यह साफ नहीं किया है कि चोरी किए गए हथियार बरामद हुए हैं या नहीं. जांच जारी है.
चोरी का पता 31 अगस्त को उस समय चला, जब 'कोट' और बटालियन मैगजीन यानी गोला-बारूद रखने वाले स्टोर को खोला गया. वहां पहुंचने पर दरवाजों के ताले टूटे हुए मिले. इसके बाद सेना में हड़कंप मच गया और मामले की जानकारी पुलिस को दी गई.
मद्रास रेजिमेंट की 20वीं बटालियन के एक लेफ्टिनेंट कर्नल की शिकायत पर बोलारम थाने में हथियारों और गोला-बारूद की चोरी का मामला दर्ज किया गया. सेना ने अपनी तरफ से आंतरिक जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इतनी बड़ी मात्रा में हथियार आखिर शस्त्रागार से बाहर कैसे चले गए?
यह मामला सिर्फ चोरी का नहीं है. सवाल सेना की सुरक्षा व्यवस्था का है. जिस जगह हथियार और गोला-बारूद रखे जाते हैं, वहां सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम होने चाहिए. अगर वहां से पांच राइफल और सात पिस्तौल समेत बड़ी मात्रा में गोला-बारूद चोरी हो जाता है, तो यह निश्चित रूप से गंभीर सुरक्षा चूक है. देश की सुरक्षा का दावा करने वाली सरकार के सामने इससे बड़ा सवाल और क्या हो सकता है कि देश के अपने शस्त्रागारों में ही हथियार सुरक्षित नहीं हैं? जब सेना के हथियार रखने वाली जगह से राइफल, पिस्तौल, मैगजीन और गोला-बारूद चोरी हो जाएं तो सवाल सिर्फ चोरी का नहीं रह जाता, सवाल पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर खड़ा होता है. क्या देश सचमुच सुरक्षित हाथों में है?
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