सवाल
मैं शादीशुदा महिला हूं. शादी को 2 वर्ष हो चुके हैं. यह मेरी दूसरी शादी है. पहले पति से तलाक होने के बाद मैं बहुत दुखी रहती थी. कारण, मायके में कोई नहीं था जो मुझे सहारा देता. ऐसे में मेरे पति ने दोस्त बन कर मुझे संभाला. हमारी दोस्ती कब प्यार में बदल गई पता ही नहीं चला. फिर इन्होंने अपने परिवार वालों से बात कर के मुझ से निकाह कर लिया.
पहले विवाह से मेरे 2 बेटे हैं, जिन्हें पति ने तलाक के बाद अपने पास रख लिया था. मुझे बेटों की बहुत याद आती है. पति से इस बारे में बात नहीं कर सकती. हर समय परेशान रहती हूं. कभी लगता है कि दूसरी शादी कर के मैं ने भूल की. बताएं मैं क्या करूं?
जवाब
आप ने बताया नहीं कि पहले पति से आप का तलाक क्यों हुआ वह भी तब जबकि आप 2-2 बेटों की मां बन चुकी थीं. अपनी जिंदगी का इतना बड़ा फैसला करने से पहले आप को अपने बच्चों के बारे में सोचना चाहिए था. पर आप ने अपने स्वार्थ में उन के बारे में तनिक भी विचार नहीं किया. आप को समझना चाहिए था कि संबंध विच्छेद का सब से अधिक खमियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है.
फिर पति कोई वस्तु नहीं कि पसंद नहीं आया तो बदल लो. विवाह एक समझौता है, जिस में पतिपत्नी दोनों को ही अपनेअपने अहं को छोड़ कर तालमेल बैठाना पड़ता है. खासकर तब जब आप पर बच्चों की जिम्मेदारी होती है. आप की परिस्थिति से लगता है कि आप ने आवेश में आ कर जल्दबाजी में इतना बड़ा कदम उठा लिया और विडंबना देखिए कि दूसरे रिश्ते से भी आप असंतुष्ट हैं.
इस का सीधासीधा अर्थ है कि कमी आप के अपने स्वभाव में है. बेहतर होगा कि रिश्तों को निभाना सीखें. जहां तक अपने बेटों के लिए आप की छटपटाहट है तो वह बेमानी है. उस के लिए आप को पहले सोचना चाहिए था. अब तो संभवतया आप के बच्चे भी आप से मिलना नहीं चाहेंगे और आप के पति और उन के परिवार को भी आप की यह हिमाकत नागवार गुजरेगी.
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