बैंगलुरू में ट्रैफिक की समस्या नई नहीं है, लेकिन लोग इससे बचने के लिए नएनए रास्ते जरूर खोज लेते हैं. सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो जम कर वायरल हो रहा है जिस में एक शख्स जाम से बचने के लिए एक पहिए वाली इलैक्ट्रिक यूनीसाइकिल का सहारा लेता दिख रहा है. वायरल हो रहे इस वीडियो में देखा जा सकता है कि जहां कारें और मोटरसाइकिलें सड़कों पर रेंग रही हैं, वहीं यह शख्स हेलमेट पहन कर बड़ी आसानी से एक पहिए पर बैलेंस बनाते हुए गाड़ियों के बीच से निकल जाता है.
गाड़ियों की लंबी कतारों के बीच से आसानी से निकल जाने के कारण कम्यूटिंग का यह काफी तेज तरीका नजर आ रहा है. इलैक्ट्रिक होने के कारण इस से न तो प्रदूषण होता है और न ही पैट्रोल का कोई खर्च आता है. कुछ लोग इस आइडिया की तारीफ कर रहे हैं तो वहीं कुछ ने सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं.
@Shinde_Revati21 आईडी पर शेयर किए गए वीडियो के कमैंट सैक्शन में कई यूजर्स ने बेंगलुरु की खस्ताहाल सड़कों व गड्ढों का जिक्र करते हुए पूछा कि एक पहिए वाली साइकिल ऐसे रास्तों पर कितनी सुरक्षित रहेगी. वहीं, कुछ लोगों का कहना था कि यह टैक्नोलौजी देखने में तो अच्छी है लेकिन महंगी होने की वजह से हर किसी के काम की नहीं है.
हम Gen Z हैं, बकवास नहीं सहेंगे’
सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में एक महिला सुरक्षाकर्मियों से बहस करती दिख रही है. शुरू में दावा किया गया कि यह वीडियो कश्मीर का है जहां रास्ता बंद करने को ले कर महिला ने हंगामा किया. कहा गया कि ट्रैवल रिस्ट्रिक्शन की वजह से महिला और कई टूरिस्ट घंटों तक एक ही जगह पर फंसे रहे और 5 घंटे के इंतजार के बाद आखिरकार महिला का गुस्सा फूट पड़ा, लेकिन जब इस वीडियो की सच्चाई पता लगी तो कहानी थोड़ी अलग निकली.
जांच में पता चला है कि यह वीडियो कश्मीर का है ही नहीं. यह वीडियो लद्दाख के मिनीमार्ग चैकपोस्ट का है और जुलाई महीने में शूट किया गया था, जो अब वायरल हो रहा है. दरअसल, द्रास के पास जो मिनीमार्ग चैकपोस्ट है वह जोजिला पास के बिलकुल करीब पड़ता है. यह काफी सैंसिटिव इलाका है. यहां मौसम खराब होने, सिक्योरिटी या आर्मी मूवमैंट की वजह से कई बार टूरिस्ट्स की गाड़ियों को कुछ देर के लिए रोक दिया जाता है. उस दिन भी ऐसा ही कुछ हुआ था. टूरिस्ट्स को काफी देर तक वहीं रोक दिया गया था जिस से वह महिला काफी नाराज हो गई और सुरक्षाकर्मियों से उलझ गई. इस वीडियो को एक्स प्लेटफौर्म @BundelKhandee पर शेयर किया गया है.
वीडियो में जो सब से ज्यादा चर्चा में रहा वह था महिला का एक डायलौग. महिला फोन पर वीडियो बनाते हुए कहती है– “हम Gen-Z हैं और यह बकवास हम बरदाश्त नहीं करेंगे.” इतना ही नहीं, वह वहां मौजूद बाकी टूरिस्ट्स से भी कहती नजर आती है कि आप लोग भी बोलो, चुप क्यों हो. उस का यह अंदाज देखते ही देखते इंटरनैट पर मीम बन गया.
हर बात पर ‘Gen-Z’ कार्ड खेलना सही नहीं है. इस से पूरी जेनरेशन की इमेज खराब होती है.
डांसिंग गर्ल्स
एक तरफ सोशल मीडिया पर खुद को क्रिएटर बोलने वाले गांव की गलियों में, शहरों की सड़कों पर और मैट्रो में डांस के नाम पर सिर्फ मेंढ़क की तरह उछल रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे भी जो असल में डांस को समझते भी हैं और करते भी. डांस की ऐसी ही अच्छी समझ और कला को दिखाता है लड़कियों का एक डांस ग्रुप. इंस्टाग्राम अकाउंट @gmgjddance पर लड़कियों का यह ग्रुप अपनी डांस रील्स पर 112 मिलियन, 101 मिलियन व्यूज पाता है. इन्हें अपने बेहतरीन डांस पर मिलियन लाइक्स और हजारों कमैंट्स तो मिलते ही हैं, साथ ही, इन के 1.5 मिलियन फौलोअर्स भी हैं. वे इन की प्रशंसा करते कहते हैं, “न चेहरे पर मेकअप, न पैर में महंगे जूते मगर इन के स्टैप्स में जादू है,” “ब्यूटीफुल कोरियोग्राफी,” “सोशल मीडिया पर कुछ लोग है जिन्हें असली डांस आता है.” इन्हीं के बीच कई बौलीवुड सैलिब्रिटीज ने भी इन की तारीफ की है. इतना ही नहीं, ये कई डांस शोज में अपनी कला का प्रदर्शन भी कर चुके हैं. GMG JD गर्ल्स की ये लड़कियां उन लड़कियों से बहुत आगे और काबिल हैं जो सोशल मीडिया पर डांस के नाम पर सिर्फ अपना अधनंगा बदन दिखा रही हैं, मैट्रो में बंदर की तरह झूल रही है तो कभी सड़कों पर लोट रही हैं.
क्रेजी शिवम की क्रैक कौमेडी
1.46 लाख फौलोअर्स और मिलियन लाइक्स हों रील्स पर, तो कोई भी सोचेगा कि क्रिएटर का कंटैंट अच्छा होगा. मगर जब कंटैंट देखें तो पता चलता है कि यह सिर्फ खोखली कौमेडी है और कुछ नहीं. शिवम का इंस्टाग्राम अकाउंट @crazyshivamjx हजारों फौलोअर्स और मिलियन लाइक्स तो लिए हैं लेकिन हंसी 10 सैकंड की भी नहीं. कौमेडी कंटैंट के नाम पर रील्स में सिर्फ शिवम की बेढंगी चाल, बेहाल स्क्रिप्ट और जीरो हंसी है. फिर भी कमैंट्स में लोग कहते हैं, ‘बेस्ट कौमेडियन,’ ‘भाई की एक आंख और एक टांग चलती रहती है,’ ‘बिग फैन,’ ‘भाई मजा आता है वीडियो देख के.’ मजा, लेकिन क्यों, क्योंकि रील्स में ढंग की कौमेडी या ऐक्टिंग तो है नहीं. हां, अगर इस बात पर मजा आता है कि एक क्रिएटर दिन के घंटों लगा कर भी 30 सैकंड का फनी वीडियो भी नहीं बना सकता तो यह बात हंसने लायक तो है और एक दिन यह हंसी उस क्रिएटर का भविष्य भी हंसी में उड़ा ले जाएगी.
अंकल का बेहूदा नाच
एक समय था जब लड़कियों ने पैंटशर्ट पहनना शुरू किया था तो समाज में ऊंचेनीचे संस्कारों व आचरण के तानों और अपमानों की लहर चल पड़ी थी. लेकिन आज जब पुरुष महिलाओं के वस्त्र, नहीं बेढंगे वस्त्र पहन कर समाज के बीच नाचते फिर रहे हैं तो उन्हें अपमान नहीं, मिलियन व्यूज और हजारों लाइक्स मिल रहे हैं. जैसे इंस्टाग्राम अकाउंट @biswajitdasbarsha के क्रिएटर बलाई राय को मिल रहे है. वह यहां बेढंगे कपड़े पहने बेढंगा नाच और सड़ी हुई ऐक्टिंग पेश कर रहा है और जिस जिस पर लोग 1 मिलियन, 2 मिलियन व्यूज, हजारों लाइक दे व हजारों कमैंट्स से उसे नवाज रहे हैं, जैसे ‘बहुत खूब दादा,’ ‘बहुत अच्छी वीडियो बनाई,’ ‘खूबसूरत.’ वहीं, कुछ चुटकी लेते कहते हैं, ‘अंकल, पेट कम करो,’ ‘7 महीने के प्रैग्नैंट अंकल,’ ‘इंस्टाग्राम पर कोई गाइडलाइन्स है या नहीं,’ ‘अब इन की क्या मजबूरी थी.’ मगर फिर भी सपोर्ट में लिखे कमैंट्स और लाइक्स को देख कर तो यही लगता है कि क्रिएटर तो सिरफिरा है ही, साथ ही, उस की तारीफ करने वाले भी समझ से कोसों दूर है.
कार पर गर्लफ्रैंड के 3,400 लिपस्टिक Kiss
सोशल मीडिया रील्स और ट्रैंड्स का बुखार लोगों के सिर चढ़ कर बोल रहा है. ग्वालियर का कार पर ‘3,400 लिपस्टिक किस’ का मामला इस बात का जीताजागता उदाहरण है कि कैसे लोग इंटरनैट पर वायरल होने की होड़ में अपना बेसिक कौमन सैंस तक खो बैठते हैं.
मध्य प्रदेश के ग्वालियर के थाटीपुर इलाके के रहने वाले आदित्य सिकरवार की गर्लफ्रैंड ने एक विदेशी सोशल मीडिया ट्रैंड से इंप्रैस हो कर कार पर लिपस्टिक से होंठों के निशान बनाने का आइडिया दिया.
गर्लफ्रैंड ने लगभग साढ़े तीन से चार घंटे की मेहनत में कार की पूरी बौडी पर करीब 3,400 लिपस्टिक किस के निशान बनाए थे.
जब आदित्य इस कार को ले कर सड़क पर निकले तो राहगीरों ने इस की फोटो और वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाल दिए, जो देखते ही देखते वायरल हो गए.
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, इस तरह से कार पर निशान बना कर सड़क पर गाड़ी चलाना ट्रैफिक रूल्स के खिलाफ है. ट्रैफिक पुलिस ने कार को जब्त कर मालिक को थाने बुलाया और उस पर 5,500 रुपए का चालान ठोंक दिया.
आजकल लोगों के लिए 15 सैकंड की रील पर कुछ लाइक्स और कमैंट्स पाना इतना जरूरी हो गया है कि वे भूल जाते हैं कि सड़क पर क्या जायज है और क्या नहीं. इंटरनैट पर ‘कूल’ या ‘रोमांटिक’ दिखने की चाहत में लोग यह भूल जाते हैं कि पब्लिक प्रौपर्टी और पब्लिक रोड्स के अपने कानून होते हैं. साढ़े तीन घंटे मेहनत कर के कार सजाई, फिर 5,500 रुपए का चालान भरा और आखिर में खुद ही थाने में जा कर कपड़े से उस पूरी मेहनत को पोंछा. इसे कूल बनना नहीं, बल्कि बिना दिमाग लगाए फजीहत कराना कहते हैं.
नग्नता को व्यूज का जरिया बनाते क्रिएटर्स
सोशल मीडिया की एक खास बात यह है कि यहां हर कंटैंट को पब्लिक तक पहुंचाने की मंजूरी मिल जाती है. कोई रोकटोक या गेटकीपिंग नहीं. ऐसे में कुछ क्रिएटर्स, जो अपनी बात बड़े मंच पर नहीं कह पाते, सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं. लेकिन इसी भीड़ में कुछ ऐसे भी क्रिएटर्स हैं जो लाइक्स और व्यूज के लालच में छिछली रील्स बना कर पोस्ट करते हैं. उन्हीं में से एक हैं payal_vlogs98. यह लड़की ज्यादातर जिम में रील्स बनाती दिखती है लेकिन इस की एक वीडियो जिस ने सभी का अटैंशन अपनी ओर खींचा वह थी ‘गेट रैडी विद मी’ वाली रील.
इस वीडियो को 97 लाख लोग देख चुके हैं और देखें भी क्यों न, इस क्रिएटर का कंटैंट ही ऐसा है जो ज्यादा से ज्यादा लोगों को देखने को मजबूर करता है. इस रील के पहले फ्रेम में लड़की पीछे से अपने सारे कपड़े उतार देती है और बैक एंगल से ही दूसरे कपड़े पहनती है. इस तरह की रील्स कामुकता पैदी करती हैं और लोग देखने को उत्सुक हो जाते हैं. रील को लाखों लोग लाइक और शेयर कर चुके हैं.
खैर, ऐसी रील्स से क्रिएटर्स तो पैसा कमा लेते हैं लेकिन देखने वालों का क्या. जब तक दर्शक खुद ऐसे खाली कंटैंट को रिजैकक्ट करना शुरू नहीं करेंगे और अच्छे कंटैंट पर अपना समय नहीं देंगे, तब तक सोशल मीडिया जानकारी का साधन बनने के बजाय केवल एक ‘ग्लैमरस डिस्प्ले सैंटर’ ही बना रहेगा.
मीनिंगफुल कंटैंट
फूहड़ रील्स के बीच आज बिना गालीगलौज के सर्कास्टिक कंटैंट देख पाना काफी मुश्किल हो गया है. मिलियंस की भीड़ में उंगलियों पर गिने जा सकने वाले ही ऐसे क्रिएटर मिलेंगे जो सर्काज्म को बेहतर ढंग से पेश करते हैं. उन्हीं में से एक हैं, dead.cells07. इस अकाउंट में 3-4 लड़के कुछ डायलौग्स में अपने कंटैंट को फनी बना देते हैं. इन का कंटैंट कभीकभी सरकार की खामियों पर भी होता है. अपने पौइंट्स को डायरैक्ट न बोल कर ये क्रिएटर व्यंग्य की भाषा बोलते हैं. वायरल वीडियो नीट पेपर लीक को ले कर था, जिसे लाखों लोगों ने लाइक किया.
कौमेडी मजेदार होने के लिए जरूरी नहीं कि तेज आवाज वाली हो. कभीकभी दोचार सूखे डायलौग और सही टाइमिंग ही काफी होती है.
रील्स की इस भीड़ में जहां हर कोई ज्यादा से ज्यादा शौकिंग और वायरल होने की कोशिश कर रहा है, वहां dead.cells07 का लो एफर्ट दिखने वाला लेकिन स्मार्ट सर्काज्म एक अलग तरह की जगह बना रहा है. और शायद सोशल मीडिया पर इस वक्त दर्शकों को इसी तरह की थोड़ी सधी हुई, कम शोर वाली कौमेडी की जरूरत भी है.
बच्ची के आंसू भी अब कंटैंट हैं
इंस्टाग्राम पर वायरल होने की चाहत में अब शायद कंटैंट की कोई सीमा नहीं है. एक रील में 7-8 साल की बच्ची खाना बनाती नजर आती है. मां कैमरे के पीछे से वीडियो शूट कर रही है और बच्ची रोते हुए पूछ रही है, “हम से खाना क्यों बनवा रही हो?” आजकल आंसू भी एंगेजमैंट दिलाते हैं और मासूमियत तो वैसे भी वायरल होने की गारंटी मानी जाती है. कंटैंट क्रिएटर्स की दुनिया में शायद अगला बड़ा सवाल यही है, बच्चा रो रहा है, तो कैमरा बंद करें या रील बना दें? जवाब व्यूज तय करेंगे. इस वीडियो को divya_official079 नाम के पेज से इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया है. इस वीडियो को 19 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं. इस अकाउंट पर ज्यादातर इस बच्ची को रील में खाना बनाते देखा जा सकता है. कभीकभी उस की मां भी रील बनाती दिख जाती है.
बच्ची से खाना बनवाना सिर्फ व्यूज के लिए किया गया स्टंट है. विडंबना देखिए, जिस उम्र में बच्चों को खेलना, पढ़ना और अपनी पसंद की चीजें सीखनी चाहिए, उस उम्र में कुछ मातापिता उन्हें कैमरे के सामने ‘परफौर्मर’ बना रहे हैं. इस के लिए दर्शक भी कम जिम्मेदार नहीं. हम हर भावुक वीडियो को लाइक, शेयर और कमैंट दे कर ऐसी रील्स का बाजार बड़ा करते हैं.
कंटैंट बनाइए, लेकिन बच्चे की मासूमियत को कंटैंट की कीमत मत बनाइए. हर आंसू वायरल होने के लिए नहीं होता.
एलियन स्टार
इंस्टाग्राम पर एक ऐसा लड़का मिलियंस में व्यूज बटोर रहा है, जिसे देख कर पहली नजर में लगता है कि शायद किसी साइंस फिक्शन फिल्म का एलियन गलती से रील्स की दुनिया में आ गया है. दावा है कि उस का कंटैंट कौमेडी है, लेकिन हंसी नहीं आती.
वीडियो में अजीब एक्सप्रैशन, कुछ बेतुकी हरकतें और तेजतर्रार डायलौग्स देख कर उम्मीद होती है कि अब शायद हंसी आएगी. लेकिन फिर रील खत्म हो जाती है और चेहरे पर वही सवाल रहता है कि इस में मजेदार क्या था? फिर भी व्यूज मिलियंस में हैं. alian_star_नाम से इस लड़के को हर रील में लाखों व्यूज मिले हैं. और तो और, 17 लाख फौलोअर्स भी इसे ऐसे कंटैंट की वजह से मिले हैं.
ऐसे कंटैंट क्रिएटर्स को देख कर लगता है कि आजकल वायरल होने के लिए टैलेंट से ज्यादा जरूरी है लोगों को दो सैकंड के लिए चौंका देना. कंटैंट अच्छा हो या न, बस, चेहरा ऐसा हो कि स्क्रौल करती उंगली रुक जाए.
मयंक की ग्लैम कौमेडी
सोशल मीडिया प्लेटफौर्म्स पर ‘नौलेज’ और ‘आइडिया’ शेयर करना तो जैसे पाप है. जिस प्लेटफौर्म को समाज में अवेयरनैस विचारों और बातचीत का साधन बनना चाहिए था, वह अब महज एक ‘चेंजिंग रूम’ और ‘मेकअप रूम’ बन कर रह गया है.
Thatsarcastictrash के वीडियोज पर मिलियंस में व्यूज आते हैं. अपने वीडियो में मयंक लिपसिंक करते हुए मेकअप ट्रांसफौर्मेशन करता है. उस के ज्यादतर वीडियोज ऐसे ही हैं. मयंक तिवारी के 3 लाख से ज्यादा फौलोअर्स हैं. वह किसी कंपनी में डाटा एनालिस्ट की जौब भी करता है. हर रील में वह लड़की के अटायर पहन कर वीडियोज बनाता है.
बैकग्राउंड में बजते गाने, केवल लिपसिंक, एक के बाद एक कपड़े बदलना और कैमरे के सामने सिर्फ मेकअप की बात करना आज इंस्टाग्राम कंटैंट का नया पैरामीटर बन चुका है. सब से ज्यादा चिंता की बात यह है कि इस तरह के खोखले और बिना किसी विचार या मैसेज के कंटैंट पर मिलियंस में व्यूज आ रहे हैं और क्रिएटर्स के फौलोअर्स की संख्या रातोंरात बढ़ रही है.
यह कंटैंट क्रिएटर्स के दिमाग की कंगाली को दिखाता है. जहां क्रिएटिव, रिसर्च या समाज के लिए किसी जानकारी की जरूरत होनी चाहिए थी, वहां अब सिर्फ दिखावे का सहारा लिया जा रहा है. कैमरे के सामने कपड़े बदलना या सिर्फ लिपसिंक करना न तो कोई कला है और न ही कोई कौशल. यह बिना किसी मेहनत के जल्दी लोकप्रिय होने का आसान रास्ता है. क्रिएटर्स से भी ज्यादा बड़ा सवाल उन लाखों देखने वालों पर उठता है जो इस कंटैंट को कंज्यूम कर रहे हैं.
गायनेक का जादुई हाथ का दावा
सोशल मीडिया के दौर में डाक्टर और मैडिकल प्रोफैशनल्स भी डिजिटल इन्फ्लुएंसर बन गए हैं. स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) डा. नाज फातिमा (@drnaazfatima) अपने इंस्टाग्राम कंटैंट को ले कर चर्चा में हैं. उन के इंस्टा पर 3.8 मिलियन फौलोअर्स हैं. उन्हें बेस्ट गाइनीकोलौजी अवार्ड और आइकन औफ एशिया अवार्ड जैसे कई सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है. इस का जिक्र वे अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल और बायो में करती भी हैं. वे विशेष रूप से नौर्मल डिलीवरी कराने के दावों और डिलीवरी रूम के वीडियोज बना कर सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं.
डा. नाज फातिमा के इंस्टाग्राम अकाउंट पर ऐसे कई वीडियो मौजूद हैं जिन में लेबररूम के अंदर महिलाओं को दर्द से चिल्लाते, रोते और कराहते हुए दिखाया जाता है. इन इमोशनल और सैंसटिव पलों को शूट कर के सोशल मीडिया पर बतौर कंटैंट पोस्ट किया जाता है. कई लोग इसे नौर्मल डिलीवरी की अवेयरनैस के रूप में देखते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ मैडिकल एथिक्स और मरीज की गोपनीयता को ले कर सवाल भी खड़े होते हैं.
उन के एक वायरल वीडियो में एक गर्भवती महिला की सास उन से कहती हुई नजर आती है कि “मैडम, आप का हाथ जादुई है, आप बस छू देंगी तो बच्चा ठीक से और आसानी से हो जाएगा.”
किसी डाक्टर का हाथ लगा देने, छू देने या कोई व्यक्तिगत जादू किसी महिला की नौर्मल डिलीवरी तय नहीं कर सकता. डिलीवरी नौर्मल होगी या सिजेरियन, यह पूरी तरह से महिला के पेल्विक स्ट्रक्चर, बच्चे की पोजीशन, एम्नियोटिक द्रव, बच्चे की धड़कन और मां की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है.
मैडिकल साइंस में किसी भी प्रक्रिया को ‘जादुई स्पर्श’ मानना अंधविश्वास है. हर मरीज की शारीरिक स्थिति अलग होती है. स्थिति बिगड़ने पर सिजेरियन औपरेशन ही मां और बच्चे की जान बचाने का एकमात्र सुरक्षित वैज्ञानिक जरिया होता है.
डाक्टर का अनुभव और सही समय पर सही फैसला लेना बेशक बहुत मायने रखता है लेकिन नौर्मल डिलीवरी को किसी ‘चमत्कार’ के रूप में पेश करना या डिलीवरीरूम की स्थिति को कंटैंट बनाना स्वास्थ्य जागरूकता से ज्यादा सोशल मीडिया पब्लिसिटी की ओर इशारा करता है. मरीजों को भी यह समझना होगा कि सही मैडिकल स्थिति ही सुरक्षित डिलीवरी की गारंटी होती है, न कि कोई जादुई दावा.
लड़कियां फौलो नहीं करेंगी, तो पटरी से नहीं हटूंगा
सोशल मीडिया पर लाइक्स, व्यूज और फौलोअर्स पाने का सनकभरा जनून किस हद तक खतरनाक हो सकता है, इस की ताजा बानगी महाराष्ट्र के वाशिम जिले से सामने आई है. यहां एक युवक ने सोशल मीडिया पर मशहूर होने के चक्कर में अपनी जान की परवा न करते हुए सीधे रेलवे पटरी पर जा कर एक जानलेवा रील बना डाली. @jayprakashindia अकाउंट से वायरल हो रहे वीडियो में युवक रेलवे ट्रैक के ठीक बीच में खड़ा दिखाई दे रहा है. वह वीडियो में कहता नजर आ रहा है, “वाशिम जिले की लड़कियां जब तक मुझे फौलो नहीं करेंगी, तब तक मैं रेलवे पटरी से नहीं हटूंगा.” इतना ही नहीं, फौलोअर्स पाने के इस अजीबोगरीब दांव में उस ने वाशिम की लड़कियों की कसम तक खा डाली.
फौलोअर्स और डिजिटल प्रसिद्धि पाने के लिए अपनी जान दांव पर लगाने वाले इस युवक का वीडियो अब इंटरनैट पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है. हालांकि, नेटिजन्स और स्थानीय लोग इस तरह की बेवकूफीभरी हरकत पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
रेलवे पटरी जैसी संवेदनशील और खतरनाक जगह पर इस तरह के स्टंट करना न सिर्फ युवक की खुद की जान के लिए बड़ा खतरा है, बल्कि यह रेलवे सुरक्षा नियमों का भी सीधा उल्लंघन है. पटरियों पर ट्रेन अचानक आ जाने से बड़ा हादसा हो सकता था. स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस और रेलवे प्रशासन को ऐसे रीलबाजों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि युवा वर्ग में इस तरह के जानलेवा ट्रैंड्स पर रोक लग सके.
नौकरी के आधार पर बदल गई थाली की सजावट
मां का प्यार तो सब से बड़ा माना जाता है, लेकिन एक वीडियो ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह प्यार सच में ‘बिना शर्त’ होता है या इस में भी कहीं न कहीं शर्तें छिपी होती हैं. मामला है खाने की थाली का – मां खाना परोस रही थी, लेकिन दोनों बेटों की थाली में जमीनआसमान का फर्क था. फर्क इतना साफ था कि एक बेटे ने इसे कैमरे में कैद कर लिया. देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर छा गया.
वीडियो में नजर आते हैं 2 भाई, उन की अलगअलग सजी थालियां और बीच में खड़ी मां. ऊपर से देखने में यह वीडियो मजाकिया लगता है, हंसीमजाक के अंदाज में बनाया गया लगता है लेकिन गौर से देखें तो यह हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई को उजागर कर देता है. जो भी इस वीडियो को देखता है, बात तुरंत समझ जाता है. यह वीडियो Lakshay Mehta नाम के शख्स ने शेयर किया है. वीडियो बनाने वाला बड़ा दिलचस्प अंदाज में बोलता है– “देखो, मेरे बेरोजगार भाई को खाना कैसे परोसा गया है.” वीडियो के कैप्शन में एक सीधी सी बात लिखी है– पैसा बहुत मायने रखता है, इसलिए कमाई पर फोकस करना जरूरी है.
इस के बाद वीडियो में मां की एंट्री होती है. जब मां से पूछा जाता है कि दोनों बेटों में क्या फर्क है, तो वे बड़ी सहजता से जवाब देती हैं कि यह सरकारी नौकरी वाला है, दूसरे के बारे में वे कहती हैं यह निकम्मा है.” बस, यही एक लाइन पूरे वीडियो का सार बन गई और लोगों के दिलों को छू गई.
वीडियो वायरल होते ही कमैंट सैक्शन में लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. एक यूजर ने बड़ी दिलचस्प बात लिखी– “वीडियो भले ही स्क्रिप्टेड हो, लेकिन जो मैसेज दिया गया है वह बिलकुल भी झूठा नहीं है.” यानी, भले ही यह सीन बना कर शूट किया गया हो लेकिन इस के पीछे की सच्चाई कहीं न कहीं हर घर में मौजूद है.
एक दूसरे यूजर ने तो सीधे इस पूरी अवधारणा पर ही सवाल खड़ा कर दिया– “अनकंडिशनल लव तो बस एक मिथ है.” उस का मानना था कि प्यार में भी अकसर शर्तें छिपी होती हैं, चाहे हम मानें या न.
बिट्टू तबाही का सफाई अभियान
मध्य प्रदेश का 20 साल का एक युवक इन दिनों अपने एक अलग तरह के प्रयास को ले कर चर्चा में है. जहां आमतौर पर लोग नदियों में बढ़ते कचरे और प्रदूषण को देख कर प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद करते हैं, वहीं बिट्टू तबाही नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने खुद ही सफाई का जिम्मा उठाने का फैसला किया. वह लंबे समय से नदियों और पब्लिक प्लेस पर जमा प्लास्टिक, कूड़ाकचरा और दूसरी गंदगी को हटाने में जुटा हुआ है.
अपने अकाउंट bittu_tabahi पर वीडियो को शेयर कर बिट्टू ने बताया कि फोकस खास तौर पर प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित अजनार नदी की सफाई पर है. उस का कहना है कि नदी को साफ रखने की जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि आम लोगों की भी है. इसी सोच के साथ वह बिना किसी बड़े संगठन या सरकारी अभियान का इंतजार किए खुद मैदान में उतर गया.
सब से खास बात यह है कि इस काम के लिए वह अपनी जेब से पैसे भी खर्च कर रहा है. सफाई के लिए जरूरी सामान जुटाने से ले कर उसे नदी तक ले जाने और घंटों सफाई करने तक, वह यह काम अपने लैवल पर कर रहा है. उस के वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आते रहे हैं, जिन में वह नदी और आसपास के इलाकों से कचरा निकालते हुए नजर आता है.
हालांकि, सोशल मीडिया पर हर किसी ने उस के प्रयास की तारीफ नहीं की. कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या वह सिर्फ वीडियो बनाने और वायरल होने के लिए सफाई का नाटक कर रहा है. इन आरोपों का जवाब देते हुए बिट्टू ने हाल ही में एक वीडियो शेयर किया. इस में उस ने बताया कि नदी की सफाई करना बिलकुल आसान काम नहीं था और एक घाट की सफाई में उसे 3 महीने से ज्यादा समय तक मेहनत करनी पड़ी.
बिट्टू ने अपने वीडियो में कहा कि लोग यह देख सकते हैं कि उस ने सिर्फ वीडियो नहीं बनाए, बल्कि जमीन पर काम भी किया है. उस ने सफाई के दौरान किए गए काम और अपनी मेहनत के बारे में भी लोगों को बताया, ताकि यह साफ हो सके कि उस का मकसद केवल सोशल मीडिया पर पौपुलर होना नहीं है.
चलती मैट्रो के बाहर फोन चिपकाने का ट्रैंड
इंटरनैट पर एक वीडियो आप की नजरों के सामने से हो सकता है गुजरा हो. इस में एक शख्स मैट्रो ट्रेन की खिड़की में फोन चिपका देता है. फिर चलती ट्रेन के साथ दौड़ते हुए वीडियो बनाता है और फोन ट्रेन के साथ ही आगे तक चला जाता है. इस वीडियो को 10 करोड़ से ज्यादा लोग देख चुके हैं. वहीं, इस वीडियो को ले कर कई तरह की बातें शुरू हो गई हैं.
हालांकि, यह ट्रैंड नया नहीं है. काफी समय से कई कंटैंट क्रिएटर ऐसी रील बना कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चुके हैं. लेकिन, इंस्टाग्राम पर @nikhilkochar80 नाम के हैंडल से यह रील शेयर की गई है. इस पर 131 मिलियन यानी 13 करोड़ (खबर लिखे जाने तक) व्यूज आ चुके हैं. इस शख्स ने वीडियो के कैप्शन में लिखा है- ‘मैं ने देसी वर्जन में अपना ट्रैंड सैट किया है.’ अब इस वीडियो को ले कर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. वहीं लोग इस को ले कर अपनेअपने तर्क भी दे रहे हैं.
कुछ लोगों ने इस वीडियो को 2 हिस्से में शूट किया हुआ बताया है. उन का कहना है कि शख्स ने मैट्रो के अंदर से वीडियो रिकौर्ड किया है और सिर्फ दिखाने के लिए शुरुआत में फोन को ट्रेन पर चिपकाते हुए दिखाया है. यह वीडियो सोशल मीडिया के अलगअलग प्लेटफौर्म पर खूब वायरल हो रहा है. चाहे यह एक प्रायोजित वीडियो हो या रैंडम लेकिन इस रील की काफी चर्चा हो रही है और करोड़ों लोग इसे देख चुके हैं.
म्यूजिकल कुकिंग
‘खाना बनाना एक कला है’ यह तो सुना था लेकिन एक म्यूजिकल कला, यह तो नहीं. मगर सोशल मीडिया पर फास्ट एंड फूडीयस एक ऐसे अनोखे म्यूजिकल कुकिंग रील क्रिएटर हैं जो गातेबजाते खाना बनाते भी, सिखाते भी और खाते भी हैं. इन की कुकिंग रील्स को देख कर आप को भी कुकिंग बहुत ही दिलचस्प लगने लगेगी.
ये बोरिंग कही जाने वाली सब्जियों की भी वैरायटी डिश दिखाते और बनाते हैं, जैसे लौकी का डोसा, कटहल रैसिपी आदि. इस के साथ हैल्दी रैसिपी में प्रोटीन लड्डू, औथेंटिक डिश में बंगाली डिश मछेर झोल, उत्तराखंड की हट्ट की चुड़कानी, बिहार का लिट्टीचोखा, राजस्थान की दालबाटी चूरमा बनाते हैं.
इन के इसी अनोखे अंदाज ने इन्हें इन के इंस्टाग्राम अकाउंट @fast_and _fudious पर 3.66 लाख फौलोअर्स के साथ रील्स पर मिलियंस व्यूज और लाइक्स भी दिए हैं. अफगानी चाप पर 32.6 मिलियन, लिट्टी चोखा पर 15.8 मिलियन, प्रोटीन लड्डू पर 3.7 मिलियन व्यूज मिले हैं. रील्स को लाखोंहजारों लाइक और शेयर किया गया है और कमैंट्स में भी खूब सरहाना है, ‘यह है क्रिएटिविटी,’ ‘15 सैकंड में फौलो कर दिया,’ ‘तुम लोगों के यह गाने म्यूजिकल प्लेटफौर्म पर होने चाहिए’, ‘मैं ने तुम्हारा आटा मोमो बनाया,’ ‘भाई मुझे खाना बनाना पसंद नहीं था मगर अब तुम्हें देख थोड़ाथोड़ा बना रहा हूं.’ अब इस तरह के कमैंट्स कम से कम यह दिखाते हैं कि इन रील्स को देखने वाले कुछ बनाना सीख रहे हैं न कि सिर्फ स्क्रौलिंग कर अपना टाइम नहीं खराब कर रहे हैं.
लापरवाह राइडर गर्ल
लड़कों को तो हम अकसर सड़कों पर बाइक पर टशन मारते हुए, अपनी जान को खतरे में डालते देखते रहते हैं लेकिन अब लगता है उन की लापरवाही का बुखार लड़कियों को भी धीरेधीरे चढ़ने लगा है. तभी तो बाइक पर रील्स बनाने की होड़ में ये भी अपनी जान जोखिम में डालने में पीछे नहीं हैं. इसी लापरवाही के नूमने इंस्टाग्राम अकाउंट _vaishu_yadav_24 पर दिखा रही है लखनऊ की वैशु यादव उर्फ़ राइडर गर्ल.
वह हाईवे पर बाइक तो चला रही है लेकिन कभी खड़े हो कर, तो कभी हाथ ऊपर कर के फुल स्टाइल में वह भी बिना हेलमेट पहने. क्योंकि यहां हेलमेट पहन लेंगे तो रील्स में राइडर का चेहरा कैसे नजर आएगा. आखिर, रील में राइडर का यानी उस का चेहरा अच्छे से तो दिखना चाहिए. भला उस की जान, ट्रैफिक नियम, जीवन की सुरक्षा, सड़क दुर्घटना यह सब उस के रील्स पर मिले लाइक और व्यूज से बड़े थोड़ी, बल्कि बहुत ही छोटे हैं.
जब इस तरह की रील्स को 8.70 लाख फौलोअर्स, मिलियंस व्यूज मिलने लगें तो अपनी और दूसरे की जान की कोई सोचेगा ही क्यों. वह तो वैशु की तरह ड्राइविंग नियमों को हेलमेट के साथ बांध कर कुएं में फेक आएगा और ट्रैंडिंग होने के लिए रील्स ही बनाएगा.
उन पर बहुत से बिना हेलमेट और दिमाग वाले कमेंट करेंगे, ‘वाह, 150 स्पीड और तेज करो,’ ‘खूब एंजौय करो,’ ‘लखनऊ की क्वीन,’ ‘सभी यादव भाई लाइक करो.’ वहीं कुछ फिक्रमंद लोग कहते हैं, ‘बेटा बाइक चलाओ लेकिन हेलमेट तो पहन लो,’ ‘प्लीज, ऐसा मत करो, सेफ्टी रील से पहले है,’ ‘बहन, तुम अभीअभी सड़क पर शहीद हो जाती, बंद करो यह सब,’ ‘क्या लखनऊ ट्रैफिक पुलिस ने यह रील देखी है,’ ‘बाइकिंग स्किल हेलमेट पहन कर दिखाई जा सकती है और अगर स्टाइल ही दिखाना है तो बाइक से उतर’कर दिखाओ.’
जय का आलोचनात्मक अंदाज
जहां एक तरफ युवा सिर्फ बेतुकी कौमेडी रील्स बनाने की होड़ में एकदूसरे के आगेपीछे भागने में लगे पड़े हैं वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो समाज की छोटीबड़ी समस्याओं पर बात कर रहे हैं, उन्हें दूसरे के आगे रख रहे हैं. जैसे, जय पंजाबी सोसाइटी के सामने आ रही परेशानियों को आप के सामने रखता है कुछ निराले अंदाज में.
अपने इंस्टाग्राम अकाउंट jaipunjabii, जिस के 1.78 लाख फौलोअर्स हैं, पर अपनी 28.3 मिलियन व्यूज वाली चेंज योर प्रेस्पेक्टिव रील में उस ने सड़क के गड्ढों की आलोचना करते हुए कहा, “यह गड्ढा नहीं बल्कि एंप्लौयमैंट अवसर है क्योंकि इस पर से आप की गाड़ी जाएगी तो खराब होगी और मैकेनिक के पास जाएगी. मैकेनिक उसे ठीक कर दो वक़्त की रोटी खाएगा, ज्यादा खराब होगी तो आप नई गाड़ी लोगे तो औटोमोबाइल कंपनी का फायदा होगा और गड्ढ़े में पानी भरेगा तो एक जीव यानी मच्छर को संसार में आने का मौका मिलेगा, हमारा खून पीने का मौका मिलेगा और ये गड्ढे जीवन की सीख भी देते हैं कि जिस तरह इस पर से गाड़ी ऊपरनीचे हो कर जाती है उसी तरह लाइफ में भी ऊंचनीच होती रहती है.”
इस पर चुटकी लेते हुए एक व्यक्ति ने कमैंट्स में लिखा, “भाई एक्सिडैंट होगा तो हौस्पिटल वालों की भी कमाई होगी, उन के घर भी लोग रोटी खाएंगे.” ठीक इसी तरह जय ने नीट पेपर लीक पर भी कहा कि, “उतना तो नल भी लीक नहीं होता, उतना एसी में से गैस भी लीक नहीं होती, उतना अफेयर भी लीक नहीं होते जितना इतने सालों से नीट पेपर लीक हो रहा है.” जय कभी सड़कों पर पानी, तो कभी लैंग्वेज बैरियर, स्ट्रीट सेफ्टी जैसे मुद्दों को कुछ अलग ढंग से सामने रखता है, जिसे लोग काफी सरहाते हैं.
हेलो सेलुलुलु और 100 मिलियन व्यूज
आजकल इंस्टाग्राम रील खोलिए तो लगता है जैसे इंटरनैट का ‘दिमागी संतुलन’ थोड़ा डगमगा गया है. लोग कितने पागल हो चुके हैं 15 से 30 सैकंड की रील्स के इस दौर में ट्रैंड के नाम पर बिना सिरपैर और बिना दिमाग लगाए कुछ भी कर रहे हैं, निहायत ही खलिहर लोग सोशल मीडिया पर क्या कर रहे हैं यह वे खुद नहीं समझ पा रहे हैं. ऐसे ही एक क्रिएटर हैं Devendra Kumar Singh जो bangru raja नाम से फेमस हैं. सोशल मीडिया पर उन के 1.1 मिलियन फौलोअर्स हैं. अब जरा उन के उस कंटैंट पर नजर डालिए जिसे देख कर इंटरनैट की जनता निहाल हो रही है.
एक वीडियो में वे कैमरे के सामने आते हैं और अजीब सी हंसी के साथ बोलते हैं: “हिहिहिहि हेलो सेलुलुलु हिहिहिहि रिया ए रिया, मैं तुम को दिखाता पूरा एरिया हिहिहि” न कोई तुक, न कोई बात, न कोई क्रिएटिविटी. लेकिन इस वीडियो पर व्यूज कितने हैं? पूरे 113 मिलियन. 4.5 मिलियन से ज्यादा लोगों ने इसे शेयर भी कर दिया है.
अपने दूसरे वीडियो में वे एक नाव में बैठे हैं, कहते हैं, “हिहिहिहिहि हेलो सेलुलुलु, आप का स्वागत हमारे नए वीडियो में. यह है हमारी टौप क्लास की लेम्बरगिनी जिस में हम जंगल में घूम रहे हैं.” उस के इस वीडियो में 100 मिलियन व्यूज हैं. ऐसे घटिया वाहियात कंटैंट के लिए उसे लाखों लोग फौलो कर रहे हैं. कुसूर सिर्फ क्रिएटर का नहीं, ‘खलिहर’ जनता भी बराबर की जिम्मेदार है.
अफसोस की बात यह नहीं है कि कोई इंसान कैमरे के सामने आ कर ऐसी वाहियात बातें कर रहा है. अफसोस की बात यह है कि देश की एक बहुत बड़ी आबादी इतनी फ्री और खलिहर बैठी है कि उस के पास इस बिना सिरपैर के कचरे को देखने, शेयर करने और इस पर ठहाके लगाने के लिए ढेरों घंटों का वक्त है.
जिसे पढ़ाई बुरी लगती है वो यह वीडियो देखो
सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज इंसपायरेशनल होती हैं जो आप को लाइव एग्जाम्पल्स से जीवन का नया पाठ पढ़ा देती हैं, पढ़ाई के महत्त्व को भी समझाती हैं.
एक शख्स, जिन का नाम शंकरलाल है, इंस्टाग्राम पर कंटैंट क्रिएटर हैं, वीडियो शेयर करते हैं, जिस पर 7.2 मीलियन व्यूज आते हैं. उन की इंस्टा आईडी है, @shankarlalreena. वीडियो में जब शंकरलाल गन्ने के खेतों में हाड़तोड़ मेहनत करते मजदूरों को दिखाते हुए कहते हैं- “हम 12 घंटे पसीना बहाते हैं तब जा कर दिन के 400 रुपए मिलते हैं.” शंकर अपने वीडियो में बता रहे हैं कि जिस को 6 घंटे की पढ़ाई बुरी लगती है, वह इस वीडियो को जरूर देखे.
शंकरलाल वीडियो में एक ईमानदारी और मर्मस्पर्शी बात स्वीकार करते हैं. वे कहते हैं कि जब बचपन में उन के मांबाप उन्हें स्कूल भेजते थे, तो वे किताबों का बस्ता किसी पुलिया के ऊपर रख देते थे और दोस्तों के साथ कंचे खेलने चले जाते थे.
यह कहानी सिर्फ शंकरलाल की नहीं है. यह हर उस इंसान की है जिस ने वक्त रहते शिक्षा की अहमियत को नहीं समझा और आज शारीरिक मेहनत की उस आग में जल रहा है जहां से बाहर निकलने का रास्ता बेहद कठिन है.
शंकरलाल का यह वीडियो हर उस छात्र के लिए एक आईना है जो अपने मांबाप की दी हुई सहूलियतों को ‘टेकन फौर ग्रांटेड’ मान लेता है. आप के मातापिता अपनी दिनरात की कमाई में से पैसे काट कर आप की फीस भरते हैं, किताबें लाते हैं, ताकि आप को वो दिन न देखने पड़ें जो उन्होंने देखे हैं.
हाथ लगाते ही बीमारी गायब
21वीं सदी में मैडिकल साइंस काफी तरक्की कर चुकी है, फिर भी लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अस्पतालों और डाक्टरों के बजाय बाबाओं के दरबार में पहुंच रहे हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे कई बाबा नजर आते हैं, जो दावा करते हैं कि उन के हाथ लगाते ही बीमारी ठीक हो जाती है.
हैरानी की बात यह है कि इन दावों को सुन कर लोग न सिर्फ उन पर विश्वास करते हैं, बल्कि पूजापाठ करते हैं और इलाज के नाम पर पैसे भी खर्च करते हैं. सब से बड़ा सवाल यह है कि अगर सिर्फ हाथ लगाने से बीमारी ठीक हो सकती है तो अस्पतालों में डाक्टर, जांच और दवाइयों की जरूरत ही क्यों? क्या कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग या दूसरी गंभीर बीमारियां सिर्फ किसी बाबा के आशीर्वाद से ठीक हो सकती हैं?
आस्था रखना किसी की निजी पसंद हो सकती है, लेकिन आस्था के नाम पर इलाज को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. बीमारी शरीर में होती है और उस का कारण समझने के लिए जांच और सही चिकित्सा जरूरी है.
इस वीडियो को shyamjimanaunawale नाम के पेज से इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया है जिस में 40 हजार लाइक्स हैं. इस अकाउंट के 16 लाख फौलोअर्स हैं.
फ्री का खाना और कंटैंट
सोशल मीडिया पर इन दिनों बच्चों का एक ऐसा ग्रुप नजर आता है कि जब वे रोज किसी न किसी की मदद से खाने की पार्टी करते दिखाई देते हैं. बताया जाता है कि उन के फौलोअर्स में से कोई एक व्यक्ति उन्हें पैसे देता है और अगले दिन उन्हीं पैसों से बच्चे जम कर खाना खाते हैं. देखने में यह सब मजेदार और मासूम लग सकता है, लेकिन इस के पीछे एक गंभीर सवाल छिपा है कि क्या इन बच्चों का बचपन और भविष्य कहीं मुफ्त के खाने के चक्कर में फंस तो नहीं रहा?
बच्चों के लिए अच्छा खाना, घूमनाफिरना और मौजमस्ती जरूरी है, लेकिन उस से भी ज्यादा जरूरी है उन की पढ़ाई, अनुशासन और भविष्य की तैयारी. अगर कम उम्र में उन्हें बिना मेहनत के पैसा और खाना मिलने लगे, तो धीरेधीरे मेहनत करने की आदत और पढ़ाई में रुचि कम हो सकती है. आज जिस चीज को वे मजाक और मनोरंजन समझ रहे हैं, वही कल उन की आदत बन सकती है.
सोशल मीडिया पर surajkaju10k के नाम से बने इस अकाउंट पर बच्चे अपनी रील पोस्ट करते हैं. इन के 30 हजार फौलोअर्स हैं. यह लोकप्रियता भी बच्चों को यह भ्रम दे सकती है कि लाइक्स, फौलोअर्स और मुफ्त की चीजें ही सफलता हैं. जबकि असली सफलता शिक्षा, हुनर और मेहनत से मिलती है. इन बच्चों की मदद करनी है तो उन्हें रोज खाना खिलाने के बजाय पढ़ाई, किताबें, शिक्षा और बेहतर भविष्य की दिशा में सहयोग देना चाहिए.
थार का नशा
ट्रैफिक जाम से तंग आ कर लोग अकसर शौर्टकट ढूंढ़ते हैं. उत्तर प्रदेश के एक ड्राइवर ने ऐसा जुगाड़ भिड़ाया कि सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया. शख्स ने अपनी महिंद्रा थार को सीधा पैदल चलने वालों के लिए बने फुटपाथ पर ही चढ़ा दिया. और तो और, बगल में बैठी अपनी मां को इस के फायदे गिनाने लगा. इस अजीबोगरीब हरकत का वीडियो इंटरनैट पर आग की तरह फैल रहा है.
सामने आए वीडियो में साफ दिखता है कि भारी ट्रैफिक में फंसने के बाद ड्राइवर ने धैर्य रखने के बजाय अपनी एसयूवी को सड़क के किनारे के ऊंचे फुटपाथ पर दौड़ा दिया. मजे की बात यह है कि इस दौरान उस ने खुद अपने फोन से वीडियो बनाया और कैमरा अपनी मां की तरफ घुमाते हुए गर्व से कहा, “थार होने का यही फायदा है, आप इसे कहीं भी चढ़ा सकते हैं.”
हैरानी की बात यह रही कि बेटे की इस गैरकानूनी हरकत पर मां मुसकराती नजर आईं. कुछ दूर चलने के बाद उस ने गाड़ी वापस सड़क पर उतारी और रास्ते में एक बाइकर को भी आगे बढ़ने का इशारा किया. इस वीडियो को एक्स पर @Nalanda_index नाम के पेज से शेयर किया गया है.
इंटरनैट यूजर्स ने इस वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि ऐसी गाड़ियां बेचने से पहले खरीदार का मानसिक परीक्षण अनिवार्य होना चाहिए. वहीं, दूसरे यूजर ने याद दिलाया कि गाड़ी बड़ी होने से आप को सड़क या फुटपाथ पर चलने वाले आम लोगों की जान जोखिम में डालने का लाइसैंस नहीं मिल जाता. कई लोगों ने मां के बरताव पर भी सवाल उठाए और कहा कि अगर उन्होंने ऐसा किया होता, तो घर पर डांट के साथ मां से थप्पड़ भी पड़ता.
हर निजी बात सोशल मीडिया पर दिखाना जरूरी है क्या
सोशल मीडिया ने हमें अपनी जिंदगी दुनिया के सामने रखने का एक ऐसा मंच दे दिया है जहां अब शायद निजी और सार्वजनिक के बीच का फर्क ही खत्म होता जा रहा है. हाल ही में एक महिला ने अपने अकाउंट geetarupshingh पर एक वीडियो पोस्ट किया. उस में वह अपने पति के साथ रेलवे स्टेशन पर बैठी नजर आ रही है. वीडियो पर लिखा है कि उस की सास का निधन हो गया है और वे गांव जाने के लिए निकले हैं. वीडियो को देखने के बाद सवाल उठता है कि आखिर किसी के घर में हुई मृत्यु जैसी निजी और दुखद घटना को भी सोशल मीडिया कंटैंट बना कर पोस्ट करने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
हैरानी की बात यह है कि ऐसे वीडियो को भी हजारोंलाखों व्यूज मिल जाते हैं. लोग देखते हैं, कमैंट करते हैं और शेयर करते हैं, जिस से पोस्ट करने वाले को इस तरह के और अधिक कंटैंट बनाने का प्रोत्साहन मिलता है. दुख की घड़ी में परिवार के साथ रहना और अपनों को संभालना स्वाभाविक है, लेकिन कैमरा निकाल कर हर पल रिकौर्ड करना और फिर उसे सोशल मीडिया पर डालना क्या वाकई जरूरी है?
आज सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज की होड़ ने इंसान को अपनी जिंदगी के लगभग हर पल को प्रदर्शन में बदलने के लिए मजबूर कर दिया है. हर घटना कंटैंट नहीं होती और हर निजी पल जनता के देखने के लिए नहीं होता. हमें दर्शक के तौर पर भी सोचना होगा कि हम किस तरह के कंटैंट को अपनी नजर, लाइक और शेयर दे कर बढ़ावा दे रहे हैं.
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