सवाल
मैं 25 साल की एक कुंआरी लड़की हूं. मेरे मांबाप को लगता है कि घर के बाहर हर कोई मुझे दबोचने के लिए ही बैठा है. इसी वजह से वे कभी मुझे अकेला नहीं छोड़ते हैं. यहां तक कि अपने कालेज की पढ़ाई के दौरान तक मेरी सहेलियां मेरे इर्दगिर्द ही रहती थीं, जिन से वे मेरी हर खबर रखते थे. अब वे मुझे नौकरी भी नहीं करने देना चाहते हैं. मैं उन्हें लाख बार समझा चुकी हूं कि ऐसा कुछ नहीं है और घर के बाहर मैं अपनी हिफाजत खुद कर सकती हूं, पर उन के कान पर जूं तक नहीं रेंगती. इन सब बातों से घर पर तनाव का माहौल रहता है. मैं क्या करूं?
जवाब
आप जैसी लाखोंकरोड़ों लड़कियां घर वालों के इस रवैए से दुखी रहती हैं और जिंदगी अपने मुताबिक नहीं जी पा रही हैं. इस की सब से बड़ी वजह समाज में लड़कियों की हिफाजत की गारंटी न होना. दूसरी वजह, मांबाप द्वारा लड़कियों को आजादी न देना है. मांबाप को हमेशा यह डर सताता रहता है कि बेटी के साथ कुछ अनहोनी न हो जाए या फिर वह प्यारमुहब्बत के चक्कर में पड़ कर घर की इज्जत मिट्टी में न मिला दे. पर ये सब बकवास बातें हैं, जिन से लड़कियों को घुटन और अपनी पैदाइश पर अफसोस होता है. आप को हिम्मत जुटा कर बगावत करना होगी, तभी नौकरी कर के अपने पैरों पर खड़ी हो पाएंगी, नहीं तो जिंदगीभर यों ही पिंजरे की पंछी बन कर फड़फड़ाती रहेंगी.
अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- [email protected]
सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem




